Author Archives: dipankargiri

About dipankargiri

जब सबकुछ सफेद था तो रंग ढूढने निकल पडे। जब रंग मिले तो वापस ब्लैक एंड व्हाइट की तलाश में निकले।बस यूं ही किसी न किसी बहाने चलतो रहे।कहीं कोई मजमा दिखा तो खडे होकर देखनो लगे। किसी गली में किसी को खेलता देखा तो उसके साथ खेलने लगा। इस तरह कई सडके कई शहरों की धूल फांककर अब मुंबई की धूल देख रहा हूं।

निर्देशक की सामन्ती कुर्सी और लेखक का समाजवादी लैपटॉप (part 3)

मुझे याद है हमारे शहर में एक खिलाड़ी सिंह थे …कोयले के माफिया ..बड़ा बंगला .अनगिनत गाड़ियाँ और ट्रक …..विधानसभा में जाकर डकार लेने वाले ..हमारे इलाके का हर नौजवान वैसा ही बनना चाहता था ….जाने अनजाने वो हमारे समाज … Continue reading

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निर्देशक की सामन्ती कुर्सी और लेखक का समाजवादी लैपटॉप (part 2)

(continued from previous post) लोग “बायसिकल थीव्स ” की बात करते हैं ..”मालेगांव के  सुपरमैन” की बात करते हैं और फिल्मो के जुनून में पगलाए रहते हैं ….सिनेमा को बदलने की बातें करते हैं पर ब्लू फिल्म की बातें कोई … Continue reading

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